



'हुसैन के बाद' नाम से इस ब्लॉग की शुरआत की जा रही है -
क्योंकि हुसेन जिन कारणों से देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे उनके बदले उन्हें 'देवी देवताओं' की नग्न आकृतियों की वजह से उनके खिलाफ भारतीय मानस बेचैनी महसूश किया और भले ही जिन्होनें उनके खिलाफ फतवा जारी किया, वह धीरे धीरे पुरे जनमानस को झकझोर दिया है, और आज उन्हें इन्ही कारणों से देश छोड़ना पड़ा, देश तो कईयों ने छोड़े है पर उन्हें अपने धर्मों में बुराइयाँ दिखी थी, पर हुसेन को यही बुराइयाँ अपने धर्म में न दिखायी देकर हिंदुयों के देवी देवताओं में दिखीं .
कारण हिन्दू देवी देवताओं के इस तरह के चित्रों में उन्हें रचना की जो खूबियाँ दिख रही थी वह किसी 'बुर्के' के भीतर नज़र न आना आँखों पर पट्टी बांधना नही तो क्या है ?
हुसैन की खूबियाँ -
जिस सामान्य से साईन बोर्ड पेंटर ने यह मुकाम हासिल क्या वह उसकी लगन और मेहनत ही है .
जिस भारतीय कला तत्वों को मकबूल फ़िदा हुसेन की कला ने स्वीकार और संवरण किया वही तत्त्व इन्हें स्मरणीय बनाते है.
पर स्मरण रहे हुसेन के जाने के बाद वह कला देश इनकी कला को क्या करेगा फेंक तो देगा नहीं, स्वाभाविक है हिंदुस्तान की कला इतिहास में यह पहले आदमी होंगे जिन्हें कला के नाम पर देश निकाला मिला है या भय से यह देश छोड़ कर चले गए है, जो भी है रचनाकार के कौशल के कारण हाथ कटवा लेने की परंपरा पुराणी रही है , मध्यकाल की कहानी रोज़ दुहराई जाये यह भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में ही हो सकता है.बौद्धिकता की बरगलस बस यहीं संभव है, सदविचार तो मात्र बहाना भर है |




